प्रमोद व्यास
उज्जैन। केंद्रीय जेल भैरवगढ़ में वर्ष 2020 से 2023 के बीच बहुचर्चित जीपीएफ गबन कांड हुआ था,जिसकी जांच अब आर्थिक अपराध शाखा ईओडब्ल्यू द्वारा की जाएगी।
मध्य प्रदेश सरकार के गृह मंत्रालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। अब तक इस मामले की जांच स्थानीय स्तर पर और विशेष जांच दल द्वारा की जा रही थी, मामले की गंभीरता, बड़ी धनराशि और कई स्तरों पर मिली अनियमितताओं को देखते हुए इसे आर्थिक अपराध शाखा को सौंपने का निर्णय लिया गया है।
13.50 करोड़ रुपये का घोटाला
उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में लगभग 13.50 करोड़ रुपये के जीपीएफ घोटाले का खुलासा हुआ था। जांच में सामने आया था कि जेल में पदस्थ सहायक लेखा अधिकारी रिपुदमन सिंह ने कर्मचारियों के जीपीएफ खातों से फर्जी तरीके से राशि निकाल ली थी। बिना कर्मचारियों की अनुमति और बिना वैध प्रक्रिया अपनाए उनके खातों से रकम निकालकर अन्य खातों में स्थानांतरित की गई। बताया गया कि 60 से अधिक कर्मचारियों के खातों से 120 से ज्यादा लेन-देन के माध्यम से करोड़ों रुपये की निकासी की गई।
तत्कालीन जेल अधीक्षक भी पहुची जेल
इस मामले में पूर्व जेल अधीक्षक उषा राज सहित कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान बैंक खातों, लॉकर और संपत्तियों की भी पड़ताल की गई थी। आरोप है कि निकाली गई राशि का उपयोग निजी लाभ और अन्य गतिविधियों में किया गया।
प्रकरण की वित्तीय जांच होगी
अब आर्थिक अपराध शाखा पूरे प्रकरण की वित्तीय जांच करेगी। शाखा यह जांच करेगी कि धनराशि किन-किन खातों में गई, किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई, और क्या इस घोटाले में अन्य लोग भी शामिल थे। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रशासनिक नियंत्रण और ऑडिट व्यवस्था में कहां चूक हुई।
सरकार की पारदर्शी पहल
सरकार के इस निर्णय को मामले में पारदर्शी और व्यापक जांच की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आर्थिक अपराध शाखा की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई और मजबूत हो सकती है।

